meri kavitayein
Sunday, 21 September 2014
दिल में जब भी गुरुर आया
खुद को खुदा से दूर पाया
औरों की खामियां ही रहा देखता
अपना नज़र न कुसूर आया
राहे बद पर हूं जब भी चला
यकीं जानो कोइ फितूर आया
टीले बैठा अना के जब मैं
इस दिल को तो न ज़रूर आया
ऐ मौला कर दे मुझ पे करम
तेरी शरण में हुज़ूर आया |
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